
क्या आपको वह दिन याद है जब आपका लोन पास (approve) हुआ था?
शायद वह कोई पर्सनल लोन था, अपने बच्चों के लिए स्टूडेंट लोन या फिर किसी मेडिकल इमरजेंसी के लिए लोन। उस वक्त लोन का पास होना किसी जीत जैसा लगा था। एक राहत की सांस, कि “चलो, अब काम हो जाएगा।”
लेकिन आज, कुछ साल या महीने बाद, क्या वही राहत अब एक भारी बोझ नहीं बन गई है?
RIS के एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 में बैंकों (SCBs) द्वारा दिए गए कुल कर्ज में अनसिक्योर्ड लोन (जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड) की हिस्सेदारी बढ़कर 25.3% हो गई है, जो मार्च 2016 में लगभग 18% थी। यह दिखाता है कि लोग बिना गारंटी वाले महंगे लोन ज्यादा ले रहे हैं।
हम अक्सर सोचते हैं कि लोन की कीमत सिर्फ ‘ब्याज’ (Interest) है जो हम बैंक को चुकाते हैं। लेकिन गहराई से सोचें, क्या आप सिर्फ पैसा चुका रहे हैं? या उसके बदले में अपनी रातों की नींद, घर का सुकून और मन की शांति भी किस्तों में चुका रहे हैं?
आज भारत में लाखों लोग ऐसे हैं जो सुबह उठते ही सबसे पहले तारीख देखते हैं कि कहीं आज EMI कटने का दिन तो नहीं? अगर यह कहानी आपको अपनी सी लग रही है, तो यकीन मानिए, आप अकेले नहीं हैं। और सबसे ज़रूरी बात इस कहानी का अंत बदला जा सकता है।
जब हम “लोन का मोल” (Cost of Loan) की बात करते हैं, तो हमारा ध्यान सिर्फ प्रोसेसिंग फीस और ब्याज दर पर जाता है। लेकिन लोन की असली कीमत वह है जो आपके बैंक स्टेटमेंट में नहीं दिखती, पर आपकी ज़िंदगी के हर पन्ने पर दिखाई देती है।
पैसों का तनाव घर की चार दीवारी में गूंजता है। जो डाइनिंग टेबल पहले हंसी-मजाक का केंद्र थी, अब वहां या तो खामोशी होती है या फिर खर्चों को लेकर बहस। लोन का दबाव अक्सर पति-पत्नी के बीच की समझ और धैर्य को खत्म कर देता है।
लगातार तनाव (Stress), हाई ब्लड प्रेशर, और डिप्रेशन जैसी समस्याएं अब आम हो गई हैं। हर वक्त फोन बजने का डर कि कहीं रिकवरी एजेंट का कॉल न हो, इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। क्या कोई भी वस्तु, चाहे वह कितनी भी कीमती क्यों न हो, आपकी सेहत से ज़्यादा ज़रूरी है?
लोन लेने का मकसद था सपनों को पूरा करना। लेकिन विडंबना देखिए, उसी लोन को चुकाने के चक्कर में अब आप नए सपने देखने से डरने लगे हैं। बच्चों की उच्च शिक्षा हो या परिवार के साथ छुट्टियां बिताना, हर फैसला अब “EMI के बाद क्या बचेगा?” इस सवाल पर आकर रुक जाता है। आप जी नहीं रहे हैं, बस किस्तों के बीच के दिनों को काट रहे हैं।
अक्सर यह स्थिति हमारी लापरवाही से नहीं, बल्कि परिस्थितियों से बनती है। शायद नौकरी चली गई, बिज़नेस में घाटा हो गया, या कोई मेडिकल इमरजेंसी आ गई।
क्या आप जानते हैं? RBI (रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारतीय परिवारों की वित्तीय बचत (Net Financial Savings) पिछले 47 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। इसका सीधा मतलब है कि मुसीबत के वक्त लोगों के पास अपनी जमा पूंजी कम बची है, जिससे वे लोन और कर्ज के जाल (Debt Trap) में जल्दी फंस रहे हैं। (स्रोत: Economic Times/RBI Data FY23)
यही वह मोड़ है जहाँ हम पुराने लोन को चुकाने के लिए नया लोन लेते हैं। आप सोचते हैं कि न्यूनतम राशि (Minimum Due) भरकर काम चल जाएगा, लेकिन असल में आप मूलधन (Principal Amount) नहीं चुका रहे होते, बल्कि सिर्फ ब्याज पर ब्याज दे रहे होते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल, क्या इससे बाहर निकलने का कोई रास्ता है? क्या अपनी खोई हुई शांति वापस पाई जा सकती है?
जवाब है, हाँ। और वह रास्ता है Loan Settlement (लोन सेटलमेंट)।
हाल ही में एक IT प्रोफेशनल, जो ₹12 लाख के लोन और रिकवरी एजेंट्स की धमकियों से परेशान थे, Settle My Loan के पास आए। हमारी टीम ने तुरंत रिकवरी कॉल्स रुकवाईं और लोन को 50% कम राशि में सेटल करवाया। आज वे पूरी तरह कर्ज-मुक्त हैं और सम्मान के साथ जी रहे हैं।
जब आप अकेले बैंक या रिकवरी एजेंट्स से बात करते हैं, तो आपकी आवाज़ डर की वजह से दब जाती है। लेकिन जब Settle My Loan के विशेषज्ञ आपकी तरफ से बात करते हैं, तो वह बातचीत डर की नहीं, बल्कि अधिकारों और नियमों की होती है।
इसीलिए हम आपके लिए लाए हैं Break the Debt Chain पहल (Initiative)। यह 45 दिनों का एक ऐसा निर्धारित समाधान है, जिसके भीतर Loan Settlement हासिल किया जा सकता है।
आपके 45 दिन इस तरह काम करते हैं:
लोन का मोल पैसों में नहीं, ज़िन्दगी के पलों में आंका जाता है। आप अपनी शांति की कीमत चुकाना कब बंद करेंगे?
अपनी ज़िन्दगी को दोबारा अपने शर्तों पर जीने का हक आपको है। आज ही फैसला लीजिये। कर्ज के बोझ को उतार फेंकिए और अपनी रातों की नींद वापस पाइये। याद रखिये, पैसा फिर कमाया जा सकता है, लेकिन बीता हुआ सुकून और समय वापस नहीं आता।
Settle My Loan के साथ आज ही जुड़ें और अपनी नई, कर्ज-मुक्त ज़िंदगी की शुरुआत करें।
बिल्कुल नहीं। लोन सेटलमेंट एक पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया है। जब कोई व्यक्ति अपनी वित्तीय परिस्थितियों के कारण लोन चुकाने में असमर्थ होता है, तो बैंक और ग्राहक आपसी सहमति से लोन को एक कम राशि पर बंद (Close) करने का निर्णय लेते हैं।
जब आप सेटलमेंट करते हैं, तो सिबिल रिपोर्ट में उस लोन के आगे “Settled” लिखा जाता है, जिससे स्कोर पर कुछ समय के लिए प्रभाव पड़ता है। लेकिन, कर्ज के जाल में फंसे रहने और डिफॉल्ट करते रहने से स्कोर और भी ज्यादा खराब होता है। एक बार कर्ज मुक्त होने के बाद, हम आपको स्कोर सुधारने के लिए सही मार्गदर्शन (Credit Score Guidance) भी देते हैं।
अगर आपकी नौकरी चली गई है, वेतन में कटौती हुई है, या कोई मेडिकल इमरजेंसी है जिसकी वजह से आप EMI नहीं भर पा रहे हैं, तो आप सेटलमेंट के लिए योग्य हो सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि हम आपकी स्थिति का विश्लेषण (Analysis) बिल्कुल मुफ्त करते हैं। सही मार्गदर्शन के लिए आज ही हमारी टीम से संपर्क करें और Free Consultation (मुफ्त सलाह) प्राप्त करें।



